कुरआन के बारे में अकीदा

Sunday, April 11, 2010 9:40 AM Posted by rafiq khan

अल्लाह ने लोगों को हिदायत देने के लिए समय समय पर आसमान से किताबें
(धार्मिक ग्रन्थ) उतारी.अल्लाह ने जितनी भी आसमानी किताबें नाजिल फरमाई
वो सब हक(सत्य) है.और सब अल्लाह का कलाम(संवाद) है.इन किताबों में जो
कुछ इरशाद खुदावन्दी है सब पर ईमान लाना और सच मानना जरूरी है.किसी
एक किताब का भी इनकार कुफ्र है.मशहूर आसमानी किताबें चार है.तोरैत,जबूर
इंजील और कुरआन.तोरैत हजरत मूसा अलैहिस्सलाम पर नाजिल हुई.यह यहूदियों
का धार्मिक ग्रन्थ है.जबूर हजरत दाउद अलैहिस्सलाम पर.यह यहूदियों और ईसाईयों
दोनों का धार्मिक ग्रन्थ है.इंजील हजरत ईसा अलैहिस्सलाम पर.ये ईसाईयों का धार्मिक
ग्रन्थ है.इसे ईसाई बाइबल के नाम से पुकारते हैं.और कुरआन जो सबसे अफज़ल किताब
है हमारे पैगम्बर हजरत मुहम्मद सल्ल: पर नाजिल हुई.
कुरआन को छोड़ कर पिछली दूसरी किताबों की हिफाज़त अल्लाह ने उम्मतियों(लोगों)के
सुपुर्द फरमाई थी मगर उम्मतियों से इन किताबों की हिफाज़त न हो सकी.गलत लोगों ने
इन किताबों में अपनी ख्वाहिश के मुताबिक़ फेरबदल व कमीबेशी कर दी.मुसलमान को
कुरआन के अलावा इन किताबों पर अमल करना जरूरी नहीं.बस ईमान लाना जरूरी है कि
हमारा सब आसमानी किताबों पर ईमान है.
दीने इस्लाम क्योंकि क़यामत तक रहने वाला दीन है.इसलिए कुरआन की हिफाज़त की जिम्मेदारी
अल्लाह ने उम्मत के सुपुर्द नहीं की बल्कि उसकी हिफाज़त खुद अल्लाह ने अपने जिम्मे रखी है.
अल्लाह तआला कुरआन में इरशाद फरमाता है-तर्जुमा-बेशक हमने कुरआन उतारा और यकीनन
हम खुद इसके निगेहबान(रक्षक)है.
इसलिए कुरआन में कोई फेरबदल या कमीबेशी मुमकिन नहीं.और यह कहना कि कुरआन में किसी ने
फेरबदल या कमीबेशी कर दिया है कुफ्र है.
कुरआन किसी ख़ास इलाके या लोगों के लिए नहीं बल्कि क़यामत तक के सभी इंसानों की हिदायत के
लिए नाजिल हुआ.
पिछली किताबें सिर्फ पैगम्बरों को याद हुआ करती थी.लेकिन ये हमारे पैगम्बर मुहम्मद सल्ल: और
कुरआन का मोजजा(करिश्मा) है कि कुरआन को मुसलमान का बच्चा बच्चा याद(कंठस्थ)कर लेता है.
कुरआन अल्लाह का कलाम(संवाद) है.जो ये कहे कि कुरआन पैगम्बर हजरत मुहम्मद सल्ल: का कलाम
है या किसी इंसान का लिखा हुआ है वो काफिर है.

Comments (2)

allah sabse bada hai or hum allah or allah ke rasul per yakin rakhte hai.hum allah ke bande hai or hume or bhi jankari chahiye taki hum allah ke dwara utari gayi kitabo ki ijjat kar sake

Anis Ahamad 1-10-11
Besak humen Allah per Iman lana Chahiye

Varna dojkha ki Aag Milegi Yahi Such hain.

Post a Comment